Indradhanush

भरे खुशियों के रंग जीवन में!

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sudhajaiswal


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बच्चों की सुरक्षा और हमारी जिम्मेदारी

Posted On: 3 Aug, 2016  
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एक कोशिश जिंदगी के लिए

Posted On: 14 Apr, 2016  
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Others social issues मेट्रो लाइफ में

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शीशे सा रिश्ता

Posted On: 11 Jun, 2015  
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माँ! तुम्हारी याद सताती है

Posted On: 8 May, 2015  
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नैतिक मूल्य, धर्म और हमारा समाज

Posted On: 8 May, 2015  
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प्रकृति के रक्षक

Posted On: 20 Apr, 2015  
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गौ रक्षा हमारा परम धर्म

Posted On: 13 Apr, 2015  
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एक चिराग चैन और अमन का

Posted On: 17 Dec, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Dr. D K Pandey Dr. D K Pandey

आदरणीय जवाहर जी, सादर अभिवादन, आदरणीया शोभा जी और आपका बहुत-बहुत आभार मेरे लेख को महत्व देने के लिए| आपने हमेशा मेरे ब्लॉग पर समय देकर मेरा उत्साहवर्द्धन किया है इसके लिए हार्दिक धन्यवाद| आपके भी ब्लॉग मैं हमेशा पढ़ती हूँ पर समयाभाव के कारण सभी लोग पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाती, एक कारण ये भी है कि मोबाइल से पढ़ तो लेती हूँ पर कमेंट देना संभव नहीं हो पाता| कल भी न तो शोभा जी और न ही आपकी पोस्ट पर कमेंट पोस्ट हो पाया, जागरण पे भी कुछ समस्या है| आपके विचार से पूर्ण सहमत हूँ गायों को पालने वाले उन्हें खुला ना छोड़े न ही कसाई को सौंपें| हमारे घर में गायें तब से हैं जब मेरे पति बहुत छोटे थे| मेरे घर के सभी सदस्य गायों को घर के सदस्य की तरह प्यार करते हैं| सुबह-शाम मेरे घर में ज्यादा रोटियाँ बनती हैं गायों को अपने हाथों से प्यार से खिलाने के लिए| उन्हें तभी हमलोग किसी और के घर में देते हैं जब हम पूरी तरह आश्वस्त हो जाते है कि हमारी गायें जहाँ रहें उन्हें कोई भी तकलीफ ना हो|

के द्वारा: sudhajaiswal sudhajaiswal

आदरणीया सुधा जी, सादर अभिवादन! आपका ब्लॉग इतना महत्वपूर्ण है किआदरणीया शोभा जी ने मुझे पढने के लिए प्रेरित किया ....वैसे मैं पहले भी आपका आलेख पढता रहा हूँ ...मेरा एक निवेदन है कि अगर गोवध रोकना है तो गोवधशाला तक गायों को पहुँचाने से रोका जाना चाहिए. गाय को बेचनेवाले यह ख्याल रक्खें कि वे अपनी गाय को कसाई के हाथों तो नहीं थमा रहे. शहरों में बहुत सारी गायें सड़कों पर आवारा घूमती रहती हैं. उनके पालनहार दूध निकालकर छोड़ देते हैं ...इन आवारा गायों से कितनी दुर्घटनाएं होती हैं या होते होते बच जाती हैं. ..."पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी कुत्ता के लिए" यह मैंने भी एक महात्मा ईश्वर बही ओझा के प्रवचन में सुना था. गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।... वैसे इस सार्थक आलेख के लिए बधाई और आपका अभिनन्दन!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सुधा जी पाकिस्तान को इस्लामी साम्राज्य में कोई दिलचस्पी नहीं है । ऐसा होता तो अमेरिका के पैसे से तालिबान के सफाए की नहीं सोचता । उसे अपनी भूख और दरिद्रता के निदान हेतु विदेशी खैरात की हमेशा सख्त ज़रूरत रहती है और उसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है । वह जानता है कि आतंकवाद ख़त्म तो खैरात ख़त्म, इसलिए आतंक की कोख को सिंचित करते रहना उसकी मजबूरी भी है । अपनी सुविधानुसार उसने अच्छे और बुरे आतंकवाद की दोहरी परिभाषाएँ गढ़ रखी हैं । भारत की नाक में दम करके रखने वाला आतंकवाद अच्छा है, जबकि पाकिस्तान से अपनी ज़मीन खाली कराने को तत्पर तथाकथित तालिबानी कबाईली बुरे आतंकवादी हैं । नफ़रत की बिना पर पैदा हुए पाकिस्तान की झोली में नफ़रत के शिवा कुछ नहीं है । छोटी बड़ी हर ज़रूरत के लिए खैरात पर ही निर्भर है । किसी दरिद्र से उच्च कोटि की मानवीय भावनाओं की अपेक्षा करना बेमानी है ।

के द्वारा: आर.एन. शाही आर.एन. शाही

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

आदरणीया सुधाजी ! सादर अभिनन्दन ! एक बहुत विचारणीय और अनुकरणीय लेख की रचना करने के लिए बहुत बहुत बधाई ! आपने अपने लेख में सही सुझाव दिया है-अब सहना बंद करो तभी तुम पर अत्याचार बंद होंगे। अरे जगाओ अपने भीतर की शक्ति को, तुममें ही दुर्गा है, काली है, तुम ही जननी हो इस सृष्टि की और आज तुम्हारा ही अस्तित्व खतरे में है। तुम्हें अब लड़ना ही होगा, भूल जाओ उस दौर को जब इज्जत की खातिर ये समाज बेटियों को चुप रहना सिखाता था, अपमान का विष पी जाना सिखाता था। उसी का परिणाम सामने आ रहा है विकृत मानसिकता के रूप में जहाँ मासूम बच्चियों तक को वहशी दरिन्दे अपना शिकार बनाने से नहीं हिचकते। कोई नहीं है रक्षक अपनी रक्षा के लिए खुद तैयार रहो। एकजुट होकर विरोध करो।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sudhajaiswal sudhajaiswal

के द्वारा: sudhajaiswal sudhajaiswal

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: Sumit Sumit

के द्वारा: Mann Ki Kawita Mann Ki Kawita

के द्वारा: ajaykr ajaykr




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