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प्रकृति के रक्षक

Posted On: 20 Apr, 2015 Others में

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प्रकृति का हरा-भरा सौंदर्य किसे नहीं लुभाता, किसका मन हरे–भरे पेड़-पौधों, स्वच्छ हवा की ताजगी से हर्षित नहीं होता होगा मगर क्या हम सभी प्रकृति के रक्षक हैं? आज ये सवाल हर किसी को खुद से पूछने की जरुरत है क्योंकि अगर हम सभी प्रकृति के रक्षक नहीं बने और अपने रहन-सहन के तरीकों में बदलाव नहीं लाये तो वो दिन दूर नहीं जब ईंट और कंक्रीट के परिवेश में मनोरम प्राकृतिक दृश्य, स्वच्छ हवा और स्वच्छ जल दुर्लभ हो जायेगा| अगर हम चाहते हैं कि हमें और हमारी आने वाली पीढ़ी को प्रदूषित वातावरण में ना जीना पड़े तो हमें ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को दूर करने के लिए इकोफ्रेंडली बनना होगा|
इस धरती को हरा-भरा बनाये रखने के लिए संतुलित और सुव्यवस्थित चक्र का होना जरुरी है, हम इंसानों की आधुनिक जीवन शैली और सुख-सुविधा के उपकरणों से पर्यावरण का चक्र असंतुलित हो गया है| इसका परिणाम है पर्यावरण प्रदूषण| यदि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है तो हमें गाँवो की ओर लौटना होगा, शारीरिक श्रम को बढ़ावा देना होगा जो आजकल की आधुनिक जीवन-शैली में बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो गया है|
ओजोन परत हमारा रक्षा कवच- हमारे 16 से 25 किमी ऊपर एक मोटा रक्षा कवच ओजोन परत है जो हमारे द्वारा प्रयोग में लाये जा रहे फ्रीज़ और एयर कंडीशन के कारण लगातार पतला हो रहा है इनमे प्रयुक्त क्लोरो फ्लोरो कार्बन हमें नुकसान पंहुचा रहे हैं| ये ओजोन परत को जगह-जगह से पतला कर रहे हैं जिससे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणें हम पर पड़ रही हैं जो हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रही है परिणामस्वरूप हम चर्म कैंसर, आँखों की बीमारी और भी कई रोगों के शिकार हो रहे हैं|
कार्बोन मोनो ऑक्साइडके अत्यधिक उत्सर्जन के कारण हरित गृह प्रभाव बढ़ रहा है जिससे पृथ्वी का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है यदि इसे रोकने के प्रति हम जागरूक ना हुए तो विश्व के कई महानगर समुन्द्र में विलीन हो जायेंगे|
बदलाव की पहल घर से- बदलाव के लिए स्वयं पहल अपने ही घर से करना होगा, हम स्वयं प्रकृति से प्रेम करें और अपने बच्चों को भी प्रकृति की रक्षा का महत्व समझाएं| उपहार में भी फूलों के पौधे या कोई भी छोटा पौधा लगाने को दें| घर में इकोफ्रेंडली उत्पादों का प्रयोग करें जिससे जल, मिट्टी और वायु को शुद्ध रखा जा सके| अपने घर के आस-पास पेड़-पौधे लगायें| कचरे को घर के आस-पास ना फेंके और नॉन बायोडीग्रेडेबल कचरे को रिसाइकिलिंग के लिए भेजें|
रिसाइकिलिंग पर ध्यान दें- 90% प्लास्टिक की बोतलें और पोलीथिन रिसाइकिल नहीं हो पाती इसलिए इनका प्रयोग ना करें| पुराने कपड़ों को बैग और पायदान बनाने में इस्तेमाल करें| पेपर बैग और जूट से बने सामान भी अच्छे विकल्प हैं| पुराने फर्नीचर को उसके लुक में बदलाव लाकर दुबारा इस्तेमाल में ला सकते हैं|
सौर उर्जा को दे अहमियत- सौर उर्जा से संचालित होने वाले घरेलू उपकरणों को अहमियत दें| बाजार में सोलर लाइट्स, सोलर गीजर और सोलर इन्वर्टर उपलब्ध हैं इनका उपयोग करें इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा| बिजली, पानी और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का जरुरत भर ही उपयोग करें|
ये धरती प्रकृति के श्रृंगार से ही सुन्दर और रहने योग्य है, प्रकृति को हम जितना प्यार देंगे उससे ज्यादा हम पायेंगे| जब तक सभी का प्रकृति की रक्षा में सहयोग नहीं होगा प्राकृतिक संसाधनों को हम दूषित होने से बचा नहीं पायेंगे| यदि धरती से प्रकृति रुष्ट हो गई तो समय पर बारिश नहीं होगी और अन्नदाता [किसान] को दुःख मिलेंगे, हम सबकी जिम्मेदारी बनती है अपनी धरती माँ और अन्नदाता के प्रति तो संकल्प करें हम मिलकर प्रकृति की रक्षा करेंगे, हम प्रकृति के रक्षक बनेंगे|
- सुधा जयसवाल

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
April 21, 2015

उत्तम सुझाव अगर अमल में लाया जाय शर छोड़ फिर से गांव जाया जाय!

    sudhajaiswal के द्वारा
    April 22, 2015

    आदरणीय जवाहर जी, लेख की सराहना के लिए धन्यवाद|

rameshagarwal के द्वारा
April 20, 2015

जय श्री राम  अच्छे और सार्थक लेख के लिए हार्दिक सुभकामनाये.हमारे ऋषि मुनिओ ने इस पर बहुत ध्यान दिया था और नियम बनाये थे सब वेदों में लिखा है आधुनिकता में भूल गए.

    sudhajaiswal के द्वारा
    April 22, 2015

    आदरणीय रमेश जी, सही कहा आपने| प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

anilkumar के द्वारा
April 20, 2015

आदरणीय सुधा जी , अत्यन्त उपयोगी सुझाव दिये हैं आपने । काश सब उस पर अमल करें ।  मनुष्य को अपनी सुख सुविधाओं के लिए प्रकृति को चुनौती नहीं देनी चाहिए , उसका सम्मान  करना चाहिए । वह अत्यन्त शक्तिशाली है । वह जब रूष्ट होती है तो इन्सान का आस्तित्व  खतरे में पड़ जाता है । 

    sudhajaiswal के द्वारा
    April 22, 2015

    आदरणीय अनिल जी, लेख की सराहना और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

Shobha के द्वारा
April 20, 2015

प्रिय सुधा जी ज्ञान वर्धक उपयोगी लेख धरती हमारी है इसकी रक्षा करना हमारा धर्म है डॉ शोभा

    sudhajaiswal के द्वारा
    April 22, 2015

    आदरणीया शोभा जी, लेख को पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!


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