Indradhanush

भरे खुशियों के रंग जीवन में!

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एक कोशिश जिंदगी के लिए

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समय की कीमत पहचानना और समय के
साथ कदम मिलाकर चलना आसान नहीं
इसके लिए जरुरत होती है धैर्य, दृढ इच्छा
शक्ति, आत्मविश्वास और सही समय-प्रबंधन
की| बीता हुआ समय कभी भी वापस
लौट कर नहीं आ सकता, वर्तमान समय
बीत ही जाना है और आने वाला समय
हमारे वर्तमान समय को कितने
प्रयासों और मेहनत से संवारा इस बात पर
निर्भर करता है| हमने क्या खोया और
क्या पाया इन बातों का मंथन करने
का कोई फायदा नहीं वो बीते हुए कल
की बात थी, जिंदगी को नए सिरे से आगे
बढाने के लिए वर्तमान समय को संवारें|
समय बदला तो इन्सान की जरूरतें बदली
और जरूरतों के हिसाब से सोंच बदली तो
जीवनशैली में बदलाव आया| भौतिक सुख
साधनों के अभ्यस्त होते इंसान की
जिंदगी तनावपूर्ण हो गई| सुख-सुविधा
के सारे सामान हैं पर न तो खुद के लिए
समय है न ही परिवार, दोस्तों और
समाज के लिए| समय के साथ बदलाव तो
स्वभाविक है पर हमें जीवनशैली को
संतुलित और सामान्य रखने के लिए कुशल
समय-प्रबंधन करना होगा जिसमें हमारे
हर कार्य के लिए एक निश्चित समय
निर्धारित हो| भौतिक संसाधनों के
कारण हमारी शारीरिक सक्रियता
कम हो गई है जिससे सेहत पर बुरा प्रभाव
पड़ा है| योग, ध्यान और प्राणायाम
को जीवन में शामिल करें और खान-पान
का विशेष ध्यान रखें| क्या खाएं और
कितना खाएं पर ध्यान देना जरुरी है|
अच्छा और पौष्टिक खाना खाएं और समय
पर खाएं| हाँ सही है कि हर इंसान पर
कार्य और जिम्मेदारियों का दबाव
रहता है, वर्तमान जीवनशैली में समय का
भी अभाव रहता है और इन सबके बीच तन-
मन को स्वस्थ रखना आसान नहीं पर ये
पूरी तरह से हम पर निर्भर है कि हम किस
तरह अपने जीवन को जीना चाहते हैं|
हमारी अच्छी आदतें ही जिंदगी को
सही दिशा दे सकती है, और सेहतमंद
जिंदगी जीने का उत्साह भर सकती है|
बदलते समय के साथ सोंच को बदलें,
सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं| क्या
हुआ, क्यूँ हुआ, क्या खोया, क्या पाया,
को भूल जाएँ और खुश रहें क्योंकि हमारी
जिंदगी में जो भी अच्छा होगा वो
पूरी तरह से हमारे मन की ख़ुशी पर
निर्भर है इसलिए खुद की ख़ुशी को
प्राथमिकता दें क्योंकि खुद खुश होंगे
तो सबकी ख़ुशी अच्छी लगेगी| हमारी
ख़ुशी के दो मजबूत स्तम्भ होते हैं, पहला
परिवार और दूसरा दोस्त| १००% परफेक्ट
कोई भी इंसान नहीं होता, रंग रूप कद-
काठी, ये सब बाहरी चीजें हैं| असली
सुन्दरता और व्यक्तित्व, हमारे मन की
सुन्दरता होती है| गुण-दोष सभी
इंसानों में होते हैं| गुणों को बढाए जा
सकते हैं और दोषों को दूर किये जा सकते
हैं| हमारा व्यवहार खुद के प्रति,
परिवार और दोस्तों के प्रति
सहयोगात्मक और सकारात्मक होना
चाहिए| हम परिवार और दोस्तों की
नकारात्मक बातों को नजरअंदाज करें और
उनके सकारात्मक बातों पर ध्यान दें|
कड़वाहट और गलतफहमियां बातचीत से दूर
की जा सकती हैं, जरुरत होती है समय और
अहमियत देने की परिवार को, दोस्तों
को|
आजकल एक बात जो इंसान को अपनी
गिरफ्त में जकड़े है वो है खुद को सर्वेसर्वा
समझने वाला एटीट्यूड यानि जो मैं कहूं
वही सही है, मेरी बात हर हाल में
मानी जाये| खुद को दूसरों की जगह
रखकर सोंचें जरुरी नहीं कि हमेशा आप
ही सही हों| कभी-कभी दूसरों की
सलाह भी लें, उनकी भी सुनें और उनकी
बातों को भी तवज्जो दें|
आने वाले कल की चिंता में अक्सर लोग आज के
खूबसूरत पलों को जाया करते हैं, जो
होना है वो होकर रहेगा कल पर
हमारा वश नहीं पर आज पूरी तरह से
हमारा है तो क्यूँ न आज को सुन्दर और सुखद
बनायें| बेशक अपने काम को अपना सौ
प्रतिशत दें पर परिणाम की चिंता
छोड़ दें| मन के बोझ को कम करने के लिए
लोगों से बातचीत करें, संगीत सुनें, घूमने
जाएँ, प्रेरक किताबें पढ़ें और अच्छी नीद
लें|
उम्र बढ़ने के साथ अक्सर काम और
जिम्मेदारियों में उलझ कर हम अपनी
रूचि और शौक को भूल जाते हैं, जिंदगी
बोझिल न हो इसके लिए अपनी रूचि के
काम करें| उम्र बढ़ रही है और लोग क्या
कहेंगे की फ़िक्र में जिंदगी को एन्जॉय
करने की बजाय ढ़ोने लगते हैं, ये सही
नहीं| बरसों पहले जो दिल में तमन्ना
थी उसे पूरा करें| संगीत, नई भाषा,
कुकिंग, डांसिंग या तैराकी सीखें, लोग
क्या कहेंगे की चिंता छोड़ कर वही करें
जो आपका दिल कहे|
हम सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर
बहुत चिंता और तनाव में रहते हैं, जरुरत
चिंता के बजाय सहज रहकर बच्चों को
समझने की होती है| हमें अपने बच्चों को
गाइडलाइन देना चाहिए न कि अपनी
हर बात को थोपना और अपनी इच्छा और
मर्जी को मानने की अपेक्षा रखना|
उनकी रूचि की बजाय अपनी रूचि के
हिसाब से उनसे अपेक्षाएं रखना| अच्छी
परवरिश का ये मतलब नहीं कि हमें सिर्फ
उन्हें सफल इंसान बनाना है बल्कि सबसे
पहले एक अच्छा इंसान बनाना है| बच्चों
के साथ दोस्ताना रिश्ता हो ताकि
वो अपनी रूचि और बातें शेयर करें जिससे
उनके मन को समझना, उनमें अच्छे संस्कार,
नैतिकता और सकारात्मक विचार
विकसित करना आसान हो| अच्छे
संस्कार और मूल्य हमसे ही बच्चो को
विरासत में मिलते हैं, जो हमें हमारे
माता-पिता ने सिखाया उसे हम अपने
बच्चों को सिखाएँ| घर-परिवार में एक-
दूसरे का सम्मान ही बच्चों में घर और
बाहर भी लोगों का सम्मान करना
सिखाते हैं, हमारा व्यवहार ही बच्चे
अनुकरण करते हैं| बच्चों में आदर्श गुणों को
विकसित करने के लिए हमें ही आदर्श
स्थापित करने होंगे| एक अच्छा माता
या पिता साबित होना जिंदगी
की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, इस सुकून
के आगे दुनियां की हर ख़ुशी छोटी है|
इंसान में खामियों का होना बुरा
नहीं पर अपनी खामियों को जानकार
उसे दूर करने की कोशिश नहीं करना गलत
है| किसी बुरी आदत को तुरंत बदल देना
संभव नहीं पर पर धीरे-धीरे हम उसे छोड़
सकते हैं जैसे- बात-बात पर गुस्सा होना,
अपशब्द बोलना, घंटों टीवी मोबाइल
से चिपके रहना और बिना खास जरुरत के
बार-बार शौपिंग के लिए जाना
आदि|
जिंदगी को बोझिल बनाने की बजाय
एन्जॉय करते हुए जियें, न बीते कल की सोंचें
न आने वाले कल की जरुरत से ज्यादा
चिंता करें| सोंच बदलें, खुद खुश रहें सबको खुश
रखें, ख़ुशी ही वो दौलत है जितना
बांटो उतना बढती है|
- सुधा जयसवाल

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
April 14, 2016

सुधाजी, आपकी पोस्ट का लिंक फेसबुक पर देखा तो आज बहुत दिनों बाद जेजे पर आना हुआ…बहुत अच्छा लगा कि कोई ऐसा भी है जो अपने ऊपर ध्यान देने को कह रहा है वर्ना सोशल साइट्स पर तो आजकल उपदेशों की भरमार है..सच है न..दिन भर सब के लिए कुछ न कुछ करते रहने के बाद बेइंतेहा थक जाने पर शाम को कभी कभी ऐसा ही लगता है कि काश रूपया खाया जा सकता….

    sudhajaiswal के द्वारा
    May 26, 2016

    आदरणीया सरिता जी, सादर अभिवादन, सहमत हूँ आपकी बातों से| लेख की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद|


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